सैर कर दुनिया की गाफिल... दिल्ली टू इंदौर
सैर कर दुनिया की गाफिल... दिल्ली टू इंदौर "सैर कर दुनिया की गाफिल जिंदगानी फिर कहाँ जिंदगी गर कुछ रही तो नौजवानी फिर कहाँ। " राहुल सांकृत्यायन की इन पंक्तियों से पर्यटन के प्रति उनका निजी दृष्टिकोण प्रदर्शित होता है यद्यपि उनका यह संदेश आज की भागमभाग वाली जिंदगी में प्रत्येक मनुष्य के लिए किसी औषधि से कम नहीं। देशाटन का महत्व प्राचीन काल से रहा है। आम जन हो या कोई इतिहास पुरुष सभी ने एकमत से देश-विदेश भ्रमण को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उत्तम माना है। आदि शंकराचार्य हों, स्वामी विवेकानंद हों, महात्मा गांधी हों अथवा अन्य कोई महापुरुष इन सभी ने देश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक ताने-बाने को समझने के लिए सबसे पहले देश भर की यात्राएं कीं, तत्पश्चात अपने राजनीतिक और आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की। सामान्य व्यक्ति के जीवन में भी पर्यटन और भ्रमण का महत्व कुछ कम नहीं है यदि व्यक्ति वर्ष में एक बार अपने गाँव, देहात, शहर से दूर कहीं लंबी ट्रिप पर जाता है तो वो यादें उसे अगले कई सालों तक ऊर्जावान और प्रसन्न चित्त बनाए रखती हैं। अपने ...