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सैर कर दुनिया की गाफिल... दिल्ली टू इंदौर

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  सैर कर दुनिया की गाफिल... दिल्ली टू इंदौर   "सैर कर दुनिया की गाफिल जिंदगानी फिर कहाँ   जिंदगी गर कुछ रही तो नौजवानी फिर कहाँ। " राहुल सांकृत्यायन की इन पंक्तियों से पर्यटन के प्रति उनका निजी दृष्टिकोण प्रदर्शित होता है यद्यपि उनका यह संदेश आज की भागमभाग वाली जिंदगी में प्रत्येक मनुष्य के लिए किसी औषधि से कम नहीं।  देशाटन का महत्व प्राचीन काल से रहा है। आम जन हो या कोई इतिहास पुरुष सभी ने एकमत से देश-विदेश भ्रमण को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उत्तम माना है। आदि शंकराचार्य हों, स्वामी विवेकानंद हों, महात्मा गांधी हों अथवा अन्य कोई महापुरुष इन सभी ने देश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक ताने-बाने को समझने के लिए सबसे पहले देश भर की यात्राएं कीं, तत्पश्चात अपने राजनीतिक और आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की।  सामान्य व्यक्ति के जीवन में भी पर्यटन और भ्रमण का महत्व कुछ कम नहीं है यदि व्यक्ति वर्ष में एक बार अपने गाँव, देहात, शहर से दूर कहीं लंबी ट्रिप पर जाता है तो वो यादें उसे अगले कई सालों तक ऊर्जावान और प्रसन्न चित्त बनाए रखती हैं। अपने ...

अनूठा गांव जहां एक ही मालिक है - डॉ. सत्यनारायण

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हम राजस्थानी • अनूठा गांव जहां एक ही मालिक है ब्यावर के देवमाली गांव में तीन हजार सदस्यों का कुनबा डॉ. सत्यनारायण ( साहित्यकार)  ब्यावर जिले की मसूदा पंचायत समिति से 7-8 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में एक गांव देवमाली। कच्ची मिट्टी की ईंटों से बने कुल तीन सौ घर। तीन हजार की आबादी। एक ही जाति गुर्जर। एक ही गौत्र लावणा। एक ही कुनबा। एक ही पुरखा। एक ही पारिवारिक बेल जो फलती-फूलती तीन सौ घरों तक फैल गई। एक ही खेत। एक ही मालिक देवनारायण। उनके एक ही सेवक नादाजी। उन्हीं नादाजी के वंशज हैं इस गांव के बाशिंदे। ग्यारहवीं शताब्दी का पूवार्द्ध। राजस्थान की सबसे बड़ी लोक महागाथा "बगड़ावत भारत" के नायक सवाई भोज अपने भाइयों सहित राण के राजा दुर्जनशाल के साथ युद्ध में मारे गए। सवाई भोज की पत्नी साडू अपने पुत्र देवनारायण को लेकर अपने पीहर मालवा चली गईं। एक दिन देवनारायण को कवि छोछू भाट ने पिता व काका-ताऊ की गाथा गाकर सुनाई कि जैमती द्वारा सवाई भोज से प्रेम व विवाह के कारण राण के राजा के साथ युद्ध में वे मारे गए। सभी चौबीस बगड़ावत भाइयों के खेडे उजड़ गए। साडू माता के मना करने के बावजूद देवनारायण ...

समय से संवाद

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समय से संवाद किसी भी बड़े दायित्व की सफलता केवल योजना से नहीं, बल्कि समय के प्रति अनुशासन से सुनिश्चित होती है। गुर्जर शिक्षाविद् सम्मेलन–2026 की तैयारियों के लिए भी प्रत्येक सहभागी ने अपने-अपने स्थान से समयपूर्व प्रस्थान का संकल्प लिया था। योजनाकार डॉ. राकेश राणा साहिबाबाद से, डॉ. देवेंद्र नागर गाज़ियाबाद से तथा टीम उलझन सुलझन के प्रतिनिधि मेरठ से साहिबाबाद रैपिड स्टेशन पर एकत्र होने वाले थे। वहाँ से सभी को एक साथ दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे के मार्ग से जयपुर के लिए प्रस्थान करना था और रास्ते में कोटपूतली से प्रो. जगराम सिंह को साथ लेकर आगे बढ़ना था। यात्रा की शुरुआत ने ही एक महत्त्वपूर्ण सीख दे दी। मेरठ से आने वाले प्रतिनिधि को रैपिड रेल की पहली सेवा समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी। जो विलंब प्रारम्भ में केवल दस मिनट का प्रतीत हो रहा था, वह आगे चलकर कई गुना बढ़ गया। तभी अनुभव हुआ कि समय की घड़ी कभी केवल मिनटों में नहीं चलती; एक छोटी-सी देरी भी परिस्थितियों के अनुसार घंटों का अंतर उत्पन्न कर सकती है। समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता, वह केवल अपने साथ चलने वालों का साथ देता है। इसके बाद ...

पर्यटन

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  पर्यटन-वृत्तांत भूमिका भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत केवल इतिहास के पन्नों में ही नहीं, बल्कि उसके प्राचीन मंदिरों, पवित्र नदियों और श्रद्धा से ओत-प्रोत तीर्थस्थलों में भी जीवंत रूप से दिखाई देती है। दक्षिण भारत के मंदिर अपनी भव्य स्थापत्य कला, विशाल प्रांगणों, दिव्य वातावरण और अनूठी पूजा-पद्धति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। ऐसे तीर्थस्थलों की यात्रा केवल पर्यटन नहीं होती, बल्कि आत्मा को शांति, मन को श्रद्धा और जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाला अनुभव बन जाती है। प्रस्तुत यात्रा-वृत्तांत में कुसुम जी के कावेरी संगम स्नान तथा नंजनगुड स्थित मंजुनाथ स्वामी मंदिर एवं अन्य देवालयों के दर्शन का भावपूर्ण वर्णन है, जो दक्षिण भारतीय मंदिर संस्कृति की भव्यता और आध्यात्मिकता का सुंदर परिचय कराता है। पर्यटन बेंगलुरु। कुसुम जी ने आज पवित्र कावेरी संगम में स्नान किया तथा उसके पश्चात रंगनाथ स्वामी मंदिर (भगवान विष्णु) और मंजुनाथ स्वामी मंदिर (भगवान शिव) के दर्शन किए। दक्षिण भारत के इन प्राचीन मंदिरों की एक विशेषता यह है कि आज भी यहाँ विशाल मंडप, विजय अथवा ध्वज स्तंभ तथा भव्य...