दार्जिलिंग - विजया डालमिया
दार्जिलिंग पहला इश्क चाय, फिर टॉय और इन हुस्न पहाड़ों का , क्या कहना पहाड़ों की रानी का... जी हाँ पहाड़ों की रानी और चाय की मल्लिका जब हरी चुनरी ओढ़े, टेढ़े -मेढ़े ढलानों के साथ चाय के बागानों की खुशबू में ढलती है तब सभी कह उठते हैं... भई वाह ... सुबह हो या शाम... फुर्सत हो या काम... बच्चे हो या बड़े... दोस्तों की महफिल में, मान मनुहार में, मस्ती में, सुस्ती में, बारिश की बूंदों में, सब में एक ही खुमार। एक ही नाम शुमार .... चाय । पहले इश्क की तरह चाय अपने दीवानों के दिल में धड़कन बनकर रहती है। चाय का जिक्र होते से ही एक सुगंधित हिल स्टेशन का नाम याद आता है.... दार्जिलिंग जिसकी चाय की खुशबू आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। पर्वतों की विचित्र मगर खूबसूरत श्रृंखला, मनोहर घाटियां, नदी के किनारे और हरे-भरे चाय के बागान में चाय की पत्तियों को तोड़ती महिलाओं को देखकर हम मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। सभी चित्र गूगल से साभार दार्जिलिंग में कई तरह की चाय मिलती है, जिनमें एक खास कच्चापन और तीखा स्वाद होता है। सतासी बागानों में उगाई जाने वाली चाय के हर बागान का अपना इतिहास है, किंतु यहाँ ...