समय से संवाद
समय से संवाद किसी भी बड़े दायित्व की सफलता केवल योजना से नहीं, बल्कि समय के प्रति अनुशासन से सुनिश्चित होती है। गुर्जर शिक्षाविद् सम्मेलन–2026 की तैयारियों के लिए भी प्रत्येक सहभागी ने अपने-अपने स्थान से समयपूर्व प्रस्थान का संकल्प लिया था। योजनाकार डॉ. राकेश राणा साहिबाबाद से, डॉ. देवेंद्र नागर गाज़ियाबाद से तथा टीम उलझन सुलझन के प्रतिनिधि मेरठ से साहिबाबाद रैपिड स्टेशन पर एकत्र होने वाले थे। वहाँ से सभी को एक साथ दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे के मार्ग से जयपुर के लिए प्रस्थान करना था और रास्ते में कोटपूतली से प्रो. जगराम सिंह को साथ लेकर आगे बढ़ना था। यात्रा की शुरुआत ने ही एक महत्त्वपूर्ण सीख दे दी। मेरठ से आने वाले प्रतिनिधि को रैपिड रेल की पहली सेवा समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी। जो विलंब प्रारम्भ में केवल दस मिनट का प्रतीत हो रहा था, वह आगे चलकर कई गुना बढ़ गया। तभी अनुभव हुआ कि समय की घड़ी कभी केवल मिनटों में नहीं चलती; एक छोटी-सी देरी भी परिस्थितियों के अनुसार घंटों का अंतर उत्पन्न कर सकती है। समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता, वह केवल अपने साथ चलने वालों का साथ देता है। इसके बाद ...